Friday, March 26, 2010

नरेंद्र सिंह नेगी जी के बाद

नेगी जी हमेशा अपने गीतों के माध्यम से हमें गढ़वाल की वास्तिविकता बताते हैं, हमारी भावनाओं को गीतों मैं पिरो कर प्रस्तुत करते हैं इसीलिए हम सबके चहेते हैं. जैसे जैसे समाज बदलता जा रहा हैं और लोगों मैं एहसास और भावनायें बदलती जा रही हैं वो नेगी जी के गानों मैं आप सुन कर महसूस कर सकते हैं. जैसे की "नया जमाना का छोरों कण उठी बोल, तिबारी दंद्ल्यालामा रोक न रोल", "भीना रे बिल्यती भीना, टॉप टेई वाला भीना, मेरा चुडा बुखंडा खे की जा " और ऐसे ही कई अन्य गाने हैं जो की आज के गढ़वाली व्यक्ति के मनोभावों भावनाओ को दर्शाते हैं.

कल समाज कोई और नया रंग लेके आएगा, नयी भावनाए होंगी और कोई नया गायक उन भावनाओ को अपने गीतों मैं उकेरेगा, शायद नेगी जी जैसा सक्षम न हो, पर अच्छी कोशिश को सराहा जाएगा जैसा की नेगी जी के साथ हो रहा हैं.

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