Friday, March 26, 2010

गढ़वाल की विसंगतियां

जब से मैंने होश संभाला हैं तभी से हम "अहंकार", "फिटकार", "घात" "नज़र" और ऐसे ही कई अनगिनत बातों के बारे मैं सुनते आये हैं, वास्तविकता क्या हैं इसका पता मुझे अभी भी नहीं पता, लेकिन गढ़वाल मैं शायद ही कोई ऐसा इन्सान होगा जो इनसे वंचित हो, किसी न किसी रूप मैं हर कोई इन आपदाओं से त्रस्त हैं आज भी अधिकतर लोग बीमार होने पर डॉक्टर के पास बाद मैं जाते हैं पहले बीमारी का सम्बन्ध उपरोक्त बातों से जोड़ते हैं और घरेलु नुस्के अपनाते हैं,

हर असफलता का मतलब सीधे सीधे किसी उपरोक्त आपदाओं से जोड़ा जाता हैं, हर दुसरे दिन एक नए "पुछेरे" या "बकया" का जनम होता हैं और अगर आप उनके पास जाए तो कोई न कोई आपदा आप पर जरूर निकलेगी. और यह सब एक गढ़वाली द्वारा दुसरे गढ़वाली पर किया जाता है.

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