Monday, May 10, 2010

एक गुंडा भी जब फिल्म देखने जाता हैं तो वो हीरो के नज़रिए से फिल्म देखता हैं, ऐसे ही हम कितने अच्छे या बुरे है इसका फैसला हम नहीं और लोग करते हैं, और यहाँ पर हम अपने नज़रिए से गढ़वाल की स्थिति को देख कर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं. फर्क इतना हैं की आप minimum को देख रहे हैं और हम maximum को.
अच्छे भी हम ही हैं और बुरे भी हम ही हैं. मैं अपने आप को अच्छा समझता हूँ और आप मैं ही से शायद कई लोग बिलकुल विपरीत सोच रहे होंगे. गाँव मैं अगर एक आदमी शराब नहीं पिता और १० पीते हैं तो कोई बाहर का ब्यक्ति आकर क्या कहेगा? इस गाँव मैं कोई शराब नहीं पीता या इस गाँव मैं सारे शराबी हैं. जो उस गाँव मैं शराब नहीं पीता वो भी यही कहेगा और जो पीता हैं वोह भी यही कहेगा की यहाँ सब शराबी हैं. बहुमत को ही पार्थमिकता दी जाती है.

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