Monday, May 10, 2010

जमाना बदल रहा हैं और ज़माने के साथ सब कुछ बदल रहा है, ज़माने के साथ अगर कदम मिला सको तो शायद अपना अस्तित्व बचा सको नहीं तो विलुप्त होने में कोई देर नहीं लगती. शहर की तुलना मैं हमारा गढ़वाल काफी अच्छा है, लेकिन दिन प्रति दिन शहर गढ़वाल पर हावी हो रहा हैं.पानी गाँव मैं उपलब्द नहीं हैं लेकिन कोल्ड ड्रिंक्स का नवीन फ्लेवर हर जगह मिल जाएगा.
गढ़वाल और इसके लोगों मैं अभी अपनापन जिन्दा हैं लेकिन अगर आप महसूस करे तो पायेंगे की लोग गढ़वाल मैं अपनी जड़े मजबूत करने की तुलना में उखाड़ ज्यादा रहे हैं.

मैं अभी तक एक भी ऐसे बच्चे से नहीं मिला हूँ जिसने की अपना बचपन शहर में बिताया हो या बिता रहा हैं उसको गढ़वाली भाषा का ज्ञान हो, वो समझ सकता हैं पर उसको बोल नहीं पाता, इसके पीछे वजह हैं की उसके सरंशक आपस मैं गढ़वाली मैं बातें करते हैं जिसकी वजह से उसको अपनी भाषा का केवल समझाने का ज्ञान हे, लेकिन जब यही बच्चे आगे चल कर अपनी नयी पीड़ी चलाएंगे और इनके गढ़वाली न बोल पाने के कारन इनके बच्चे गढ़वाली भाषा के ज्ञान से वंचित नहीं हो जायेंगे?

No comments:

Post a Comment