Monday, May 10, 2010

हर गढ़वाली के मन मैं अपने गढ़वाल की बहुत से यादें बसी हैं जो की उसे गढ़वाली होने पर गर्वान्वित कराती हैं. सिर्फ रोज़गार के लीये उसे अपना गाँव छोडना पड़ा और शहर का रुख करना पड़ा, यहाँ आ कर मुश्किल हालातों से जूझते हुए अपने आप को इस शहर के अनुकूल ढाला, जिसमे बहुत से कठिन हालातों से गुजरना पड़ा, और शायद अब चाहता हैं की जैसे हालत उसने झेले हैं वह उसके बच्चों को न झेलने पड़े.

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