Wednesday, June 9, 2010

पर्तिस्पर्धा समझे या इर्ष्या

जिस से भी पूछा उसने यही कहा की हाँ उत्तरांचली लोग एक दुसरे से इर्ष्या करते हैं, वजह तो स्पष्ट कोई नहीं कर पाया पर कही न कही ये साबित हो रहा हैं की यह एक कडवी सच्चाई है की पहले के और अब के लोगों मैं बहुत बड़ा बदलाव देखा गया हैं. इस बदलाव को आप अपने हिसाब से जैसे चाहे देखे, चाहे पर्तिस्पर्धा समझे या इर्ष्या.

हम गढ़वाली हैं और हमें आज भी कहने मे गर्व होता है की हम गढ़वाली हैं.
इसके पीछे वजह क्या हैं शायद हमारा समाज मैं एक अच्छा रुतबा होना हमारी संस्कृति, इमानदारी, मेहनतकश इत्यादी होने की वजह से जो की हमारे बाप दादाओं ने कमाया था!
अब हर छेत्र में पर्तिस्पर्धा बड गयी हैं और इसमें शिक्षा का सबसे ज्यादा योगदान है और हमारे गढ़वाल की शिक्षा का स्तर बहुत ही निम्न हे ऐसे में जिसके पास पैसा है वो बहार जा कर शिक्षा प्राप्त कर रहा हैं और आगे बड रहा हैं लेकिन फिर भी ज्यादातर लोग गढ़वाल मैं गरीब है जिसके चलते वो सही शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते और सही शिक्षा के आभाव में भटक जाते है और बड़ते हुए लोगों को देख कर हीन भावना का शिकार होकर निराशा में गलत कदम उठा देते हैं.

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