Tuesday, July 13, 2010

गढ़वाल की शादी

पिछले महीने मैं अपने दोस्त की शादी मैं गढ़वाल गया, बहुत मजे किये, गढ़वाल की शादी की बात ही कुछ और होती हैं.
दो घटनाएँ जो थोडा हट के थी

१. बारात मैं हम दो दोस्त अलग से ही थे दुल्हे के साथ, मैं दारु और अन्य नशीली चीजों का सेवन नहीं करता लेकिन मेरे साथ जो दोस्त था वह इनका सेवन करता हैं. बारात पहुचने पर और नास्ते के बाद सब पीने वाले अपना प्रोग्राम बना रहे थे, लेकिन मैं नहीं पीता था तो अलग सा हो गया और बारात मैं भी अपने आप को अकेला सा महसूस करने लगा क्यूंकि सब पीने वाले अपनी महफिले लगा चुके थे और उसके बाद जो गप्पे चल रही थी वह मेरे बर्दास्त के बहार थी.
सबक: गढ़वाल की शादी मैं अगर आप नहीं पीते तो आपका जाना बेकार हैं.

२. मैं बारात से जल्दी निकल गया था तो वापसी का रास्ता पैदल का था तो मैं अपनी मंजिल की तरफ चला जा रहा था, रास्ते मैं एक गाँव पड़ा और मैंने एक घर से पानी के लीये आग्रह किया उन्होंने पूछा कहाँ से आये हो और कहाँ जा रहे हो, बताने पर उन्होंने कहा की नहीं आप जो सामने दूसरा घर हैं वहां से पानी मांगो, मैं समझ गया की यह हरिजन का घर हैं.

सबक: गाँव मैं जात पात का चलन शायद ही कभी मिट पायेगा.