Sunday, July 23, 2017

देशभक्ति या मौकापरस्ती

कुछ महीनों पहले की ही बात है जब jio नही था तब सारी टेलीफोन नेटवर्क कंपनियों के कॉल और नेट पैक की कीमत एक समान थी। सारे भारत पर उनका राज था और लोगों के पास दूसरा कोई उपाय नही था उनकी मुँह मांगी कीमत देने के अलावा। 30 दिन के महीने को 28 दिन में परिवर्तित कर दिया गया है।
सरकार की टेलीफोन सेवायें ऐसी है कि लोग फ्री में भी नही लेते। ऐसी स्तिथि में सारे भारतीय बाज़ार पर उनकी मोनोपोली चल रही थी। उपभोक्ता को या तो उनकी निर्धारित कीमत चुकानी होगी या फिर उन सेवाओं से वंचित रहना होगा।

Jio के आने के बाद आज सब कम से कम कीमत पर अधिक से अधिक कॉल और नेट पैक देने की प्रतिस्पर्धा में लगे है।

चीनी सामान की तुलना हमारे यहां Jio से की जा सकती है जो कि काफी क्षेत्रों में सामान की कीमत को आम आदमी के बजट में रखे हुए है।

अगर कल चीनी सामान को बंद कर दिया जाए तो क्या भारतीय कंपनियां एकजुट होकर अपने सामान को एक निश्चित कीमत पर खरीदने के लिए आम आदमी को विवश नही कर सकती जैसा कि टेलीफोन नेटवर्क कंपनियों ने कर रखा था Jio के आने से पहले।

चीनी सामान को न कहने से पहले हम भारतीयों को अपने और दूसरे के मन को टटोलने की जरूरत है। कहीं पर कोई दुर्घटना हो जाती है और कुछ कारणवश अगर कुछ समय के लिए दैनिक उपभोग की वस्तुऐं मुहैया नहीं हो पाती है तो लोग वस्तुओं के दाम 100 गुना बढ़ा कर मुनाफा कमाने में लग जाते है।
ऐसी कई घटनायें घटित हो चुकी है, जैसे बद्रीनाथ में बाढ़ से मार्ग अवरोध होने के कारण लोगों ने जरूरत मंदो की मदद की बजाय दूध और पानी कई गुना ऊंचे दामों पर बेचे। नमक की कमी की झूठी खबर से ही लोगों ने उसके दाम रातों रात बड़ा दिए। टमाटर और प्याज़ के दाम तो अब हर साल आकाश को चुने पहुंच ही जाते है।

जवाब आपको ये खोजना है कि अगर कल चीनी सामान बंद हो जाये तो लोग देशभक्ति दिखाएंगे या मौकापरस्ती।

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Tuesday, May 2, 2017

बाहुबली 2 - मेरी नज़र से।

पूरी फिल्म आंखों को ध्यान में रख कर बनाई गई है और वाकई आंखों को प्रसन्न करती है।

कई दृश्य रोंगटे खड़े कर देते है जिसका एहसास आपको केवल सिनेमा घर मे ही महसूस होगा।

दिमाग को घर पर रख कर ही फ़िल्म देखने जायें।

सिंहासन के लिए निम्नतम स्तर की राजनीति का प्रयोग जो कि हम अक्सर सास बहू वाले नाटकों में देखते है। जहां किसी एक पक्ष की बात सुनकर दूसरे पक्ष के खिलाफ फैसला सुना दिया जाता है बिना दूसरे पक्ष की सुनवाई के बगैर।

कटप्पा जैसे गंभीर किरदार से कॉमेडी करवा के गुड़ का गोबर करना।

अंत मे लड़ाई इस कद्र दिखाई गई है कि वास्तविकता का मानव क्षमताओं से कोई लेना देना ही नही रह जाता।

हॉलीवुड की बेहतरीन ग्राफ़िक्स को टक्कर देती फ़िल्म जो लॉजिक में काफी कमजोर पड़ जाती है।

एक बार देखने योग्य पैसा वसूल फ़िल्म।

Saturday, April 22, 2017

जय माता दी।

कुछ दिन पहले एक शादी के दौरान जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 10 बजने का संकेत दिया DJ वाले बाबू ने सबकी फरमाइशों को दरकिनार कर ये ऐलान कर दिया कि अब DJ नही बजेगा। क्योंकि ये रिहायशी इलाका है और कानून के अनुसार रिहायशी इलाके में 10 बजे के बाद किसी भी तरह का जोर शोर वाला गाना बजाना वर्जित है। इससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को विभिन्न रूप से असुविधा होती है जो कि किसी भी रूप में सही नही है। और अनगिनत मिन्नतों के बाद भी DJ वाले बाबू अपना साजो सामान बटोर कर सब के अरमानों पर पानी फेर कर चले गए।

आज उसी मुहल्ले में उन्ही लोगों के बीच एक जागरण का आयोजन हो रहा है।रात के 12 बज जाने के बाद भी आयोजन भरपूर रूप से अपनी चरम ध्वनि के साथ आयोजित किया जा रहा है और सुबह तक इसी जुनून के साथ बदस्तूर जारी रहेगा।

सब कुछ उस दिन जैसा ही है फर्क सिर्फ गाने के बोलों का और भावनाओं का है।

न तो किसी को इस से किसी तरह की परेशानी है और न ही ये गैरकानूनी है।

बोल सांचे दरबार की...जय।।

Thursday, March 30, 2017

अनोखे टिप्स

आईये आज मैं आपको कुछ ऐसे टिप्स बताता हूँ जो की हर आम इंसान को पता होने चाहिए।

टिप - 1
सुबह उठने के एक घंटे के अंदर चाय या कॉफ़ी पीने से आपको शुगर होने की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है। कोशिश करे की सुबह उठ कर पानी पियें और एक घंटे बाद ही चाय या कॉफ़ी ले।

टिप - 2
अगर आप अपना मोबाइल दिन भर में दो घंटे से ज्यादा इस्तेमाल करते है तो आपको कैंसर होने के सबसे ज्यादा संभावना है और इसका सीधा असर आपके दिल और दिमाग पर पड़ता है।

टिप - 3
अगर आप बीड़ी या सिगरेट के साथ चाय या कॉफ़ी पीते है तो आपको पेट संबंधी रोग होने के सबसे ज्यादा संभावना है।

टिप - 4
अगर आप 6 घंटे से अधिक सोते हो तो आपके बाल झड़ने की समस्या की ये असली वजह हो सकती है।

टिप - 5
हफ्ते में एक बार केला या आम का शेक पीने से आपको खांसी और जुखाम की परेशानी से जीवन भर छुटकारा मिल सकता है।

टिप - 6
ऊपर जो भी टिप्स मैंने दिए है वो सब "गलत" है।
जी हाँ। सब गलत है।

आप में से 90% लोगों ने इन सब बातों को सच मान लिया होगा, क्योंकि  बहुत से लोग जिन बातों के बारे में नहीं जानते उनको सच मान लेते है और फिर बड़े ही गर्व से दूसरों को बताते है।

सिर्फ 10% होंगे जो इन पर विश्वास करने से पहले अपनी तरफ से जांच पड़ताल करेंगे और जब तक आश्वस्त नहीं हो जाते तब तक सुनी या पढ़ी बात पर विश्वास नहीं करते।

तो आप 90% वाले हो या 10% वाले ?

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Wednesday, March 29, 2017

प्रगति के नुस्खे

बहुत लम्बे समय से मै मोटीवेसनल विडियो और किताबें पड़ता आ रहा हूँ और झूठ नहीं कहूँगा, काफी हद तक मै उनसे inspire भी हुआ हूँ और मेरा नजरिया भी बदला है ।

इन किताबों और विडियो से और कुछ हुआ हो या न हुआ हो लेकिन लोगों से बात करने के लिए बहुत कुछ मिल जाता है, आप लोगों से थोडा सा हट कर देखते हो और आपके पास लोगों को बताने के लिए घटना के विपरीत का एक दूसरा पहलु भी होता है, जो की दूसरों को जल्दी से दिखाई नहीं देता।

लेकिन सही कहूं तो वास्तविकता मे ये सब देखने और पड़ने के बाद आप अपने जीवन में सिर्फ 5% परिवर्तन ला सकते हो, इसके पीछे कारण है की जिन लोगों से आपने डील करनी है वो सब इन बातों को बिलकुल बेकार समझते है या इस तरह के लोगों को समझने वालों की संख्या बहुत कम है और जब ऐसे लोग ही नहीं मिलेंगे तो आपकी बातें "भैंस के आगे बीन बजाना" जैसी हो जाएगा।

तो आइये भारत में सदियों से चले आ रहे आगे बढने और प्रगति करने के अचूक नुस्खों पर एक नज़र डालते है।

१.
तेल लगाना (चमचागिरी / तलवे चाटना / जूते चाटना / चिकना घड़ा / दल बदलू / मौकापरस्त / खाबरिलाल / जी हुजूरी करना)

जिस काम को भारत में सबसे धिक्कार और नफरत से देखा जाता है वो है "तेल लगाना", बावजूद इसके सबसे ज्यादा तेल भारत में ही लगाया जाता है, जिसको जहाँ पर मौका मिलता है वो वहीँ तेल लगाना शुरू कर देता है, क्यूंकि आगे बड़ने का ये सबसे कारगर तरीका है जो शायद कभी फ़ैल नहीं हुआ।

ऐसा समझा जाता है की तेल वो लगाते है जो कुछ कर नहीं सकते लेकिन अगर सही से आँका जाए तो इस काम में भी उतनी ही मेहनत लगती है जितना की और कामों मे लगती है और शायद उस से भी ज्यादा मेहनत लगती हो, तो ये न सोचे की जिसके बस की मेहनत नहीं होती वही तेल लगाते है क्यूंकि तेल लगा पाना भी हर किसी के बस की बात नहीं, उसके लिए भी हूनर चाहिए होता है।

अब ये आपकी सोच और आपके जमीर पर निर्भर करता है की आप कितना और किस तरह से आगे बढना चाहते है "तेल लगाकर" या "मेहनत करके", मेहनत से शायद एक बार आप असफलता का स्वाद चख सकते है लेकिन तेल लगाने से सफलता की संभावनाएँ अधिक होती है।

अगर आपने इस नुस्खे को अब तक नहीं अपनाया है तो एक बार कोशिश जरूर करे क्यूंकि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती चाहे बेईज्ज़ती हो जाए।

दुसरे नुस्खे फिर कभी...

Wednesday, March 1, 2017

आधा घंटा

साली साहिबा ने रात को कहा कि कल सुबह ऑफिस जाते समय मुझे गांव वाली बस में बिठा देना या बस तक छोड़ देना।

सुबह पूरा आधा घंटा था मेरे पास ऑफिस के लिए निकलने के लिए तो सोचा चलो आज छोटे को भी ले चलते है बड़े को स्कूल छोड़ने के लिए जाते समय।

जैसे ही बिल्डिंग से नीचे उतर कर बाइक को देखा, पंक्चर टायर ने अपनी अकड़न छोड़ कर नर्म लहज़े से मेरा स्वागत किया और  साथ में छोटे ने भी घर वापस न जा कर बड़के को स्कूल छोड़ने के लिए साथ आने की जिद्द पकड़ ली।

पैदल स्कूल जाने आने में 5 की जगह 15 मिनट लग गए। घर पे पहुँच कर साली साहिबा को खुद ही ऑटो से जाने के लिए कहा और जल्दी से रेडी हो कर बाइक धकेलते हुए पहुंचे पंक्चर वाले के पास।

जो आधा घंटा ज्यादा हो गया था वो इस प्रक्रिया में अपने साथ कीमती आधे घंटे को भी हजम कर गया।

आधे रस्ते पहुँच कर जाम की समस्या देखने को मिली। कुछ लोग गलत साइड से जा रहे थे लेकिन देर होने के बावजूद सीधे रस्ते पर टिके रहे इस उम्मीद में की जाम खुल ही जायेगा। लेकिन 15 मिनट बाद भी जाम न खुलता देख एक लंबे रास्ते की तरफ बढ़ चले ये सोच कर की लंबा सही कम से कम इस जाम से तो जल्दी ही पहुंचेंगे। लेकिन वहां पर भी जाम अपनी भुजायें फैला चूका था। एक और लंबा रास्ता लिया और जैसे तैसे ऑफिस पहुंचे वो भी केवल आधा घंटे की देरी से।

ये वही आधा घंटा था जो पहले फालतू दिख रहा था।

Thursday, February 2, 2017

असमंजस

असमंजस

पैसा कमाकर धनी बन जाऊं
या जो है उसमें ही संतुष्टि पाऊं।

त्यौहार के लिए कपड़े नये बनाऊँ
या जो है मौजूद काम उनसे चलाऊँ।

वाद विवाद कर खुद को सही ठहराऊँ
या जीत में उसकी खुशी खुद की पाऊँ।

बच्चे को डांट कर गलती बतलाऊँ
या पी के गुस्सा प्यार से समझाऊँ।

राह चलते अजनबी से आँख फिराऊँ
या बिखेर कर मुस्कान इंसानियत दिखलाऊँ।

सो कर देर तलक तृप्ति पाऊँ
या छोड़ कर मोह को घूमने जाऊँ।

#justnegi