Thursday, August 21, 2014

मेट्रो का वृतांत

वैशाली से रामा कृष्णा आश्रम तक के लिए मेट्रो ली लक्ष्मी नगर से एक युवक ने दो युवतियों के साथ प्रवेश किया और मेरे समीप आके खड़े हो गए l लड़का ठीक ठाक घर से मालूम पड़ता था और उसके साथ की युवतियों में से एक उसी के समकक्ष परिवेश से मिलती थी लेकिन दूसरी युवती थोडा आर्थिक रूप से कम संपन्न घर से महसूस हुयी l शायद तीनो महाविध्यालय के मित्र थे l युवक ने अपने समकक्ष वाली युवती से पूछा खाने में क्या लायी है और उसने पुलाव कहाँ और युवक ने उसके थेले से उसका खाने का डब्बा निकाल कर खाना चालू कर दिया l वातानुकूलित मेट्रो में खाने की गंध व्याप्त हो गयी और उद्घोषणा होती रही की “कृपया मेट्रो में खाना पीना वर्जित है“ l मन में तो आया की कुछ कहूं लेकिन शायद कीचड़ में पत्थर फेंकने पर खुद पर छीटे आने का आभास हुआ तो मन को समझा कर शांति से खड़ा रहा l इस दौरान उनका वार्तालाप भी जारी था और समकक्ष वाली युवती से युवक अधिक घनिष्टता और प्यार से बात कर रहा था लेकिन जब भी आर्थिक रूप से कम संपन्न घर वाली युवती उस युवक से कोई भी बात पूछती या कहती तो उसका जवाब युवक बहुत ही अपमान जनक स्वर और शब्दों में देता l जैसे की युवती ने पूछा की “तुम्हारा असली नाम क्या है” जवाब आया “तुझे क्या”, युवती ने पूछा “...... ये क्या तुम्हारा असली नाम है” जवाब आया की “होगा भी तो तुझे क्या”, “तू अपना दिमाग अपने पास रखा कर”, “तू बोला ही मत कर” l और युवती उस युवक के स्वर और शब्दों को हर बार एक नकली मुस्कराहट के साथ छिपा जाती l ऐसे ही जितनी भी बार वह युवती उस युवक से कुछ भी पूछती वह युवक बहुत ही अप्रिय स्वर और शब्दों में जवाब देता l लेकिन उसके साथ वाली लड़की ने एक बार भी ये जतलाने की कोशिश नहीं करी की उस युवक को ऐसा जवाब नहीं देना चाहिए था l जो मुझे एहसास हुआ की शायद तीनों एक ही कक्षा के विध्यार्थी होंगे और युवक और समकक्ष वाली युवती की अच्छी निभती हो लेकिन दूसरी युवती समकक्ष वाली युवती की सहपाठी होने के नाते एक अच्छा दोस्ताना सम्बन्ध स्थापित करने की कोशिश कर रही थी जिसके लिए युवक बिलकुल भी सहमत प्रतीत होता हुआ नहीं लगा और अपनी सभ्यता को बिना किसी लाग लपेट के प्रस्तुत करता रहा l कई बार दिल में आया की उस युवती से कह दूं की आत्म सम्मान ज्यादा महत्वपूर्ण है ऐसे किसी जबरदस्ती के सम्बन्ध स्थापित करने से लेकिन फिर दिमाग ने कहाँ की दुसरे के फटे में टांग अड़ाने से अपनी ही टांग को नुकसान होगा l मंडी हाउस तक युवक ने पूरा खाना ख़त्म किया और तीनो मेट्रो से प्रस्थान कर गए और पीछे छोड़ गए खाने की महक l

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