Saturday, July 4, 2015

उधेड़बुन

Synus के लिए होम्योपथिक का इलाज चल रहा है तो इसी कारणवश कल शाम होम्योपथिक डॉक्टर के पास पहुंचे और अधिकांश भारतवर्ष की तरह ऐसी जगह पर पहुचते ही आपका नंबर लग जाता है बिना किसी पर्ची या कूपन के, बस ये नोटिस करना पड़ता है की कौन आपसे पहले आ रखा है और कौन आपके बाद आया है l अपने से पहले आये लोगों पर एक नज़र दौड़ा कर अपने फ़ोन पर मशगुल हो गए Zombie VS Plants गेम खेलने में l इसी बीच एक बुजुर्ग दम्पति आये जिनका नंबर मेरे बाद बनता है क्यूंकि में उनसे पहले आ रखा हूँ l बुजुर्ग दम्पति के आते ही मेरे से आगे की सीटें खाली हुयी और वो उस पर बैठ गए l अब मेरे अन्दर एक उधेड़बुन शुरू हो गयी की ये आये तो मेरे से बाद में है लेकिन मेरे से आगे बेठ गए है तो क्या मुझे इन्हें ये बताना चाहिए की आपका नंबर मेरे बाद में है या इनको इल्म होगा की हमसे पहले किसी और का नंबर है l इसी उधेड़बुन में कुछ और लोग डॉक्टर से परामर्श और दवाई लेके चले गए और बुजुर्ग लोग आगे आगे खिसकते चले गए l फिर वो समय भी आ ही गया जब मेरे से पहले आये आदमी का नंबर आ चूका था और उसके बाद मेरा नंबर आना था लेकिन मेरे से पहले बुजुर्ग दम्पति अन्दर जाने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे और में असमंजस में बेठा था की इनको बोलू की नहीं की मेरा नंबर आपसे पहले है l मेरे दिमाग ने मुझे चेताया की अगर ये मुकर गए की “नहीं जी हमारा नंबर पहले है” तो मुझे फिर बोलना पड़ेगा की आप झूठ बोल रहे है और इस बात पर विवाद बढ़ सकता है और फिर दुसरे लोग भी ये ही सोचेंगे की एक जवान लड़का बुजुर्गों से पहले जाने के लिए झगड़ रहा है l क्या हो जाएगा अगर इनके बाद चला जाएगा l मेरे दिल ने कहा तो क्या में तो अपनी जगह सही हूँ l दिमाग बोला लेकिन तेरा समर्थन करने वाला तो कोई नहीं होगा और ऐसे में सच्चा होते हुए भी तू झूठा साबित हो जाएगा l और इसी बीच डॉक्टर की आवाज़ आई “next” और मेरी सारी उधेडबुने उस आवाज़ में दब कर रह गयी क्यूंकि वो दम्पति अन्दर जा चुके थे l

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