Monday, April 11, 2016

iphone

जैसी ही रेलगाड़ी अपने आखिरी स्टेशन के प्लेटफार्म पर पहुंची, लोगों में पहले उतरने की हड़बड़ाहट और जद्दोजहद शुरू हो गई। परिवार सहित होने के नाते मैंने आखिरी में ही उतरना मुनासिब समझा और जब लगभग सब लोग उत्तर चुके थे में भी उतरने के लिए आगे चलने लगा तभी अकस्मात् एक सीट पर गिरे हुए फ़ोन पर नज़रे पड़ी। पहली नज़र में भांप गया की उस सीट पर बेठे हुए शख्स की पेंट से फिसल कर फ़ोन सीट पर ही गिर गया और वो जल्दबाज़ी में उत्तर चूका है। उठाने पर माइक्रोमैक्स मॉडल का कीपैड फ़ोन जो की हाल ही में लिया हुआ प्रतीत हुआ जिसकी कीमत लगभग 2-3 हज़ार होगी, उसको अपनी जेब के हवाले किया और बस स्टेशन की तरफ अग्रसर हो गया इस उम्मीद में की उसका मालिक भी उधर ही होगा और फ़ोन खोने की चेतना पर आसपास से ही फ़ोन करेगा। लगभग 10 मिनट के अंतराल के बाद ही उस फ़ोन पर "प्रमोद" नाम से फ़ोन आया और फ़ोन खोने की बात कही। नज़दीक ही एक पेट्रोल पंप था जहाँ पर उनसे मुलाक़ात तय हुयी और 5 मिनट में ही एक बुजुर्ग एक नवयुवक के साथ मिले। फ़ोन मिलने पर उनकी ख़ुशी को मैंने अच्छे से महसूस किया शायद ये फ़ोन उनके लिए किसी iphone से कम नहीं था। धन्यबाद के साथ बुजुर्ग बोले अमूनन ऐसी चीज़े खोने के बाद अक्सर मिलने की अपेक्षा न के बराबर होती है। मैंने कहा चिंता न करे दुनिया में अच्छाई अभी बची हुयी है और फिर अपने परिवार के साथ आगे बढ़ गया। (रही बात फ़ोन को अपने पास रखने के विचार का आना, सो आया लेकिन मुझे पता था की जो ख़ुशी मुझे इस मुफ़्त के फ़ोन को प्राप्त कर होगी वो ख़ुशी उसके सामने बहुत कम होगी जो मुझे इस फ़ोन को लौटा कर मिलेगी और ऐसा में महसूस भी कर रहा हूँ)

No comments:

Post a Comment