Tuesday, May 10, 2016

लाइन

पिछले हफ्ते की घटना जो की आज की घटना का पहला चरण कहा जा सकता है।

चलते हुए जैसे ही बाइक की पेट्रोल मापक सुई ने निम्नतम स्तर को छुआ ऑफिस के रास्ते में आने वाले एक पेट्रोल पंप को ध्यान में रख कर पेट्रोल भरवाने का सुनिश्चित किया।

पेट्रोल पंप पर पहुँच कर दो बाइक के पीछे अपनी बाइक लगा के बटुए से पैसे निकाल कर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगा। इतने में दो और बाईक आई और सबसे आगे खड़े व्यक्ति के बगल में खड़ी हो गयी। जैसे ही मेरे से आगे वाले का पेट्रॉल भरा उसके बाद बगल वाले के पैसे लेकर पंप कर्मचारी उसकी बाइक में पेट्रोल डालने के लिए तत्पर हुआ मैंने टोकते हुए कहा की "पहले मेरा नंबर है, पहले मुझे पेट्रॉल मिलना चाहिए" लेकिन पंप कर्मचारी ये कहते हुए उसकी गाडी में पेट्रोल डालने लगा की अब वो आगे आ गया है तो क्या करूँ।

उसके बाद काफी उपदेश सुनाया की अगर पीछे आने वाले को पेट्रोल पहले दे दोगे तो फिर दुबारा वो आगे आएगा, लाइन में क्यूँ लगेगा। लेकिन शायद ये उनके लिए एक दिनचर्या है की लोग आते है और चिल्ला कर निकल जाते है। खैर मैंने भी पेट्रोल भरा कर अपने पथ पर बड़ गया।

आज की घटना या दूसरा चरण।

आज भी जैसे ही पेट्रोल मापक सुई अपने निम्नतम स्तर पर पहुंची तो फिर दूबारा उसी पेट्रोल पंप की तरफ अग्रसर हुए और दुर्भाग्यवश पिछले हफ्ते वाली परिस्तिथियाँ रही की दो बाइक के बाद मैंने अपना नंबर लगाया और एक बाइक फिर आगे वाले के बगल में आके खड़ी हो गयी। फिर पेट्रोल पंप कर्मचारी द्वारा पहले वाले को पेट्रोल देना और मेरा टोकना और उसका वही रटा रटाया जवाब की वो पहले आ गया तो क्या करूँ।

उसको आगे कुछ न कह के पेट्रोल भरवा कर पेट्रोल पंप के प्रबंधक से मिला और अपनी समस्या से अवगत कराया। उस कर्मचारी को बुला कर पिछली बारी और अबकी बारी का किस्सा सुनाया लेकिन उसका वही जवाब की अगर कोई आगे आ जाये तो क्या करे। फिर प्रबंधक द्वारा वही उपदेश की जो पहले आता है उसको पहले पेट्रोल दो।

तो क्या लगता है। कमी कहाँ है?

1. उस पेट्रोल पंप कर्मचारी की जो की आगे आने वाले को पेट्रॉल दे देता है। वो भी तब जब आधी से ज्यादा जनता पेट्रोल ऐसे ही भराती है।

2. उन लोगों की जो लाइन में न लग कर आगे आ कर खड़े हो जाते है।

3. मेरी जो की भारत की जनता को जानते हुए भी एक कर्मचारी की शिकायत उसके प्रबंधक से कर बेठा और उसको डाँट पिलवा दी।

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