देशभक्ति या मौकापरस्ती

कुछ महीनों पहले की ही बात है जब jio नही था तब सारी टेलीफोन नेटवर्क कंपनियों के कॉल और नेट पैक की कीमत एक समान थी। सारे भारत पर उनका राज था और लोगों के पास दूसरा कोई उपाय नही था उनकी मुँह मांगी कीमत देने के अलावा। 30 दिन के महीने को 28 दिन में परिवर्तित कर दिया गया है।
सरकार की टेलीफोन सेवायें ऐसी है कि लोग फ्री में भी नही लेते। ऐसी स्तिथि में सारे भारतीय बाज़ार पर उनकी मोनोपोली चल रही थी। उपभोक्ता को या तो उनकी निर्धारित कीमत चुकानी होगी या फिर उन सेवाओं से वंचित रहना होगा।

Jio के आने के बाद आज सब कम से कम कीमत पर अधिक से अधिक कॉल और नेट पैक देने की प्रतिस्पर्धा में लगे है।

चीनी सामान की तुलना हमारे यहां Jio से की जा सकती है जो कि काफी क्षेत्रों में सामान की कीमत को आम आदमी के बजट में रखे हुए है।

अगर कल चीनी सामान को बंद कर दिया जाए तो क्या भारतीय कंपनियां एकजुट होकर अपने सामान को एक निश्चित कीमत पर खरीदने के लिए आम आदमी को विवश नही कर सकती जैसा कि टेलीफोन नेटवर्क कंपनियों ने कर रखा था Jio के आने से पहले।

चीनी सामान को न कहने से पहले हम भारतीयों को अपने और दूसरे के मन को टटोलने की जरूरत है। कहीं पर कोई दुर्घटना हो जाती है और कुछ कारणवश अगर कुछ समय के लिए दैनिक उपभोग की वस्तुऐं मुहैया नहीं हो पाती है तो लोग वस्तुओं के दाम 100 गुना बढ़ा कर मुनाफा कमाने में लग जाते है।
ऐसी कई घटनायें घटित हो चुकी है, जैसे बद्रीनाथ में बाढ़ से मार्ग अवरोध होने के कारण लोगों ने जरूरत मंदो की मदद की बजाय दूध और पानी कई गुना ऊंचे दामों पर बेचे। नमक की कमी की झूठी खबर से ही लोगों ने उसके दाम रातों रात बड़ा दिए। टमाटर और प्याज़ के दाम तो अब हर साल आकाश को चुने पहुंच ही जाते है।

जवाब आपको ये खोजना है कि अगर कल चीनी सामान बंद हो जाये तो लोग देशभक्ति दिखाएंगे या मौकापरस्ती।

# justnegi.blogspot.com

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