Sunday, April 18, 2010

महानगर और गढ़वाल

कल मैं अपने दोस्त के साथ उसकी शादी के कार्ड बांटने गया तो मेरा कई गढ़वाली लोगों से परिचय हुआ जो की काफी समय से दिल्ली और आसपास के छेत्रों मैं बसे हुए हैं, गर्मी के ऊपर और दिल्ली के मौसम के साथ कई पहलुओं पर चर्चा हुयी और गढ़वाल की तुलना की गयी, जिसमें कुछ लोगो ने तो निश्चित कर रखा हैं की सर्विस पूरी होते ही वोह दुबारा अपने गाँव मैं जा कर बस जायेंगे और इस महानगरीय माहोल से छुट्टी पा के अपने स्वर्ग नुमा गढ़वाल मैं रहेंगे और बाकी की जिंदगी वही बिताएंगे. दिन बा दिन जिस तरह गढ़वाल का माहोल बदलता जा रहा हैं, लोगों मैं आपस मैं मतभेद बढता जा रहा हैं और गढ़वाल अपने आपको और अपनी मान्यताओं को जिस तरह खोने को आतुर हैं, ऐसी मैं आपको के लगता हैं, क्या गढ़वाल का माहोल आज भी पहले की तरह अनुकूल हैं, क्या गढ़वाल मैं दुबारा बसने का निर्णय उनका सही हैं ? अगर आप गढ़वाल मैं रहते हैं तो क्या महानगरों मैं बसना चाहते हैं और अगर आप महानगरों मैं हैं तो क्या अप्प गढ़वाल मैं बसना चाहते हैं?

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