Sunday, April 25, 2010

कुछ लहरें जल्दी शांत नहीं होती...

गढ़वाल की शैतानी आपदाओं (अहंकार, घात, नज़र, धुल, हवा इत्यादि) से हर गढ़वाली त्रस्त हैं, किसी के बुरा चाहने से और बुरा करने से किसी का बुरा हो जाता हैं पर शायद भला करने के लिए ऐसा कुछ नहीं हैं! वास्तविकता से तो शायद ही कोई अवगत होगा लेकिंग मानने से कोई इंकार नहीं करेगा और सचाई कोई जानना नहीं चाहता की आखिर यह सब क्या होता हैं और कैसे असर करता हैं. रीति चली आ रही हैं और सब उसका पालन कर रहे हैं, लोग त्रस्त हैं और त्रस्त ही रहेंगे शायद, समाधान खोजने वाले तो नहीं हैं पर इलाज करने वालों की कमी नहीं हैं, अनेक प्रकार के बाबा गढ़वाल मैं मौजूद हैं और लगे हुए हैं ऐसी आपदाओं से लोगों को मुक्ति देने पर.

आपको क्या लगता हैं की यह एक ऐसा मुद्दा हैं जिसके ऊपर हम सोच नहीं सकते या सोचना नहीं चाहते या फिर कितना भी सोच लो इन बातों का कोई समाधान नहीं हैं. समाज कितना भी बदल जाए पर हम इन चीजों को नहीं बदल सकते, यह आदि से चल रहा हैं और अनंत तक चलता रहेगा. यह चीजें सही गलत का भेद नहीं जानती,

टोटल confusion है, हजारो सवाल उठते हैं, पर शायद जवाब मुश्किल हैं या शायद कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब नहीं होता.................

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