Monday, April 26, 2010

गढ़वाल मैं उत्पन्न होती समस्याएँ

जैसे जैसे गढ़वाल उन्नति कर रहा है (इसे आप अवन्नती भी कह सकते है) दिन प्रति दिन नयी नयी समस्याएँ उत्पन्न हो रही है जो आगे चल कर एक भयंकर रूप धारण कर सकती है. जैसे की :-
जल संकट, घरेलु सब्जियों का आभाव, वनों मैं वृक्षों का आभाव, पशुओं के चारे का आभाव, खेती से उत्पन्न होने वाले अनाज में निरंतर गिरावट, ईधन के लिये लकडियो का आभाव

उपरोक्त सभी ऐसी समस्याएँ हैं जिनका बिना गढ़वाल अपना वजूद खो देगा.

अधिकतर गाँव मैं जल संकट चरम सीमा पर पहुँच चूका हैं, छोटी मोती नदियाँ तो अब केवल बरसात के मौसम मैं ही नज़र आती हैं. (बिन पानी सब सून).
घरों मैं पशुओं के चारे के आभाव मैं लोगों ने पशुपालन धीरे चीरे बंद कर दिया हैं, भैंसे पालना तो हाथी पालने जैसे होता जा रहा हैं केवल चारे के आभाव के कारण.
घरों मैं ईधन के लिये लकड़ियों के आभाव के कारण गैस का प्रचलन बढता ही जा रहा हैं जिससे चूल्हे की रोटी का स्वाद नहीं मिल पता.
जल्वायुं परिवर्तन भी काफी हद तक महानगरों के सामान होता जा रहा हैं.

सुधार के लिये कमियों का पता होना जरूरी है

No comments:

Post a Comment